Crime
पुरानी रंजिश ने लिया खूनी मोड़, सोनू कोल हत्याकांड में दो आरोपियों को उम्रकैद
छह साल पुराने हत्याकांड में न्यायालय का फैसला, जावेद और राजेश को धारा 302/34 में दोषी ठहराया; आजीवन कारावास के साथ अर्थदंड
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राहुल शीतलानी
01 Oct 2026, 05:44 PM
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उमरिया
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नौरोजाबाद से राहुल शीतलानी की रिपोर्ट
उमरिया। नौरोजाबाद थाना क्षेत्र में वर्ष 2020 में हुए सोनू कोल हत्याकांड में न्यायालय ने दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रियदर्शन शर्मा ने आरोपी जावेद मुसलमान और राजेश यादव, दोनों निवासी नौरोजाबाद, को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।
जेल से छूटकर घर आया था सोनू कोल
अभियोजन के मीडिया प्रभारी नीरज पाण्डेय के अनुसार, घटना 1 अप्रैल 2020 की रात की है। कोरोना संक्रमण के दौरान शासन के नियमानुसार जिला जेल से छूटने के बाद सोनू कोल अपने घर आया था।
घटना वाली रात सोनू अपने साथी विकास बर्मन के साथ बाजारपुरा नौरोजाबाद से सामान लेकर घर लौट रहा था। रात करीब 8 बजे दोनों बड़े ग्राउंड के पीछे पानी टंकी नर्सरी के पास पहुंचे, तभी जावेद मुसलमान और राजेश यादव ने सोनू का रास्ता रोक लिया।
पुरानी रंजिश को लेकर हुआ हमला
अभियोजन के अनुसार, पुरानी रंजिश को लेकर दोनों आरोपियों ने सोनू के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान जावेद ने धारदार चाकू से सोनू पर हमला किया, जबकि राजेश ने उसे पकड़ लिया। हमले में सोनू के गले और कमर के पीछे गंभीर चोटें आईं।
सोनू के शोर मचाने पर उसके साथ मौजूद विकास बर्मन ने बीच-बचाव किया। इसके बाद गंभीर रूप से घायल सोनू किसी तरह वहां से निकलकर नौरोजाबाद थाने पहुंचा।
पहले हत्या के प्रयास का मामला, मौत के बाद बढ़ाई गई धारा 302
पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 87/2020 दर्ज कर धारा 341, 294, 307, 34 भादंसं तथा एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। बाद में उपचार के दौरान सोनू कोल की मृत्यु होने पर प्रकरण में हत्या की धारा 302 बढ़ाई गई।
चश्मदीद हुआ पक्षद्रोही, मृत्युकालिक कथन बना अहम साक्ष्य
मामले की सुनवाई के दौरान चश्मदीद गवाह विकास बर्मन पक्षद्रोही हो गया। इसके बावजूद अभियोजन ने सोनू कोल के मृत्युकालिक कथन सहित अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
अभियोजन के मुताबिक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के विरुद्ध अपराध संदेह से परे प्रमाणित हुआ।
प्रकरण में अभियोजन की ओर से उप निदेशक अभियोजन आर.के. चतुर्वेदी, उमरिया ने पैरवी की। अभियोजन के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने जावेद मुसलमान और राजेश यादव को हत्या का दोषी ठहराते हुए दोनों को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई।
करीब छह वर्ष पुराने सोनू कोल हत्याकांड में न्यायालय के इस फैसले के साथ लंबी चली न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया।